October 2011
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“ MY ENEMY IS SO POWERFUL THAT, I CANNOT THINK OF A NORMAL HUMAN BEING’S...”
– “VANAYIDATHU PATTUPURATHU MADAMPI RAMDAS SWAMI’
Oct 11th
August 2011
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Aug 17th
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“नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी ईश्वरः सर्वलोकेषु स्थावरस्य चरस्य च...”
– श्रीमहाभारत अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय:
Aug 17th
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“सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च I वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित:...”
– “श्रीमहाभारत -अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “
Aug 17th
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“ अव्यक्तं सर्वदेहेषु मर्त्येषमरमाश्रितम यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा...”
– ’ श्रीमहाभारत-अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “
Aug 17th
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“ हरि जीउ गुफा अंदरि रखिकै वाजा पवणु वजाईआ II वजाईआ वाजा पउण नउ दुआरे परगटु किए...”
– अनंदु साहिब
Aug 17th
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“1 ). जिष्णु रथेष्ठा: समयों युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां I “निकामे निकामे...”
– ‘RAMDAS”
Aug 15th
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July 2011
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"भगवान शंकर का माहात्म्य ......!"
” इन्त ते कीरतयिश्यामी नमस्कृत्य कपर्दिने यदवाप्तम मया राजन्ज्छ्रेयो याच्चार्जितम यश: प्रयत: प्रातरुधाय यदधीये विशम्पते प्रांजलि शतरुद्रियम तन्मे निगत: शृणु प्रजापतिरस्तत ससृजे तपसोअते महातपा: शंकरस्त्वसृजत तट प्रजा: स्थावरजंगमा: नास्ति किंचित्परम भूतं महादेवत विशामपते इह त्रिषवापि लोकेषु भूतानाम प्रभवो हि स:I न चैवात्सहते स्थातुम कश्चिदग्रे महात्मन: II न हि भूतं समं तेन त्रिषु...
Jul 28th
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'श्री मुत्तप्पन' ऑफ़ 'परशिनी कड़व ' →
Sree Muthappan and Dogs Muthappan Temple Sree Muthappan is always accompanied by a dog. Dogs are considered sacred here and one can see dogs in large numbers in and around the temple. One can see two carved bronze dogs at the entrance of the temple that are believed to symbolize the bodyguards of the God. When the Prasad is ready it is first served to a dog that is always ready inside the...
Jul 23rd
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’ VETTAKKORU MAKAN”
Jul 23rd
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“शौनकादी - हम सब एक हैं…!’ ****************************** कल तक हम...”
– “ஒ.என்.அப்பா குருப் (காஞ்சிரம் கோயில்)”
Jul 23rd
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यह मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर ....! →
” मुहमद सादिक जब ५३ साल पहले CLARK.C.मूरे हुआ करता था तो उसकी प्रेमिका ने यह ख़त लिखी थी….!.अब ५३ साल बाद वे जब मुहमद सादिक हुआ तो - उसकी अतीत के तरफ ध्यान खींचने - प्रेमिका की मदत से - गिर्जा यानि चर्च के किये हुए एक खेल हैं यह ….!. अगला कदम यह होंगे ’ मोहमद सादिक’ के दहलीज़ पर जीरेवाले मुस्कान के साथ एक “अंगेल एंड होली दुओ” , ANGEL AND HOLY DUO….!....
Jul 19th
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"VAHE GURU' →
तुलसी दास महाराज जी को अपनी पत्नी रत्नावली से बहुत प्यार था ..!. वह कभी भी उसे अपने से दूर रखना चाहते थे…..!. कहते हैं की एक बार रत्नावली अपनी मयके चली गयी….!. तुलसीदास उसके बिना न रह सके …..!. वे आधी रत को ही उठकर अपनी ससुराल की और चल दिए ……!. रात तेज आंधी , तूफ़ान , बिजलीकी थी…!. प्रेम के दीवाने तुलसीदास अपने आगे किये कदम पीछे नहि किये …..!. आगे एक नदी थी...
Jul 19th
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" RAHIM "
Pakistani and Indian nationals form a human chain to express their sympathy towards the victims of Mumbai blasts in New Delhi on Saturday 16-7-11 समयदेसा कुल देख कै , सबै करत सनमान I रहिमन दीन अनाध को , तुम बिन को भगवान I सब को सब कोऊ करै , राम जुहार सलाम I हित अनहित तब जानिए , जा दिन अटके काम I रहिमन रिसको छोडिके, करो गरीबी भेस I मीठो बोलो, नै चलो, सबै तुम्हारे देस I रहिमन प्रीती...
Jul 19th
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PADMANBHA TEMPLE.....! →
” THE PEOPLE OF KERALA, ESPECIALLY PEOPLE OF TRAVANCORE ,MUST BE INDEBTED TO THE ROYAL FAMILY FOR KEEPING THIS WEALTH OF OURS SAFE AND SECURE TILL DATE, ‘THIRUMANASSINU NANDI ‘….!
Jul 7th
tumblrbot asked: WHAT IS YOUR EARLIEST HUMAN MEMORY?
Jul 7th
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Jul 4th
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“” न केवालानाम पयसा प्रसूतिमवेही माम कामदधाम प्रसन्नाम’ ’ गाय...”
– ” महाकवि कालिदास -रघुवंश
Jul 4th
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““ओई साजन और मीत पिआरे जो हमको हरी नाम...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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“बिसरी गयी सभ ताती पराई जब ते साथ संगती मोहि पाई” “जबसे मुझे सत्यगत...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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“” आतम रामू सर्व महि पेख पूरण पूरि रहीअ प्रभ एक ……!” ...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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“’ दुखु न देई किसे जीअ “ “किसी भी जीव को दुःख नहीं देना चाहिए...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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““धन भूमि का जो करे गुमानु सो मूरख अँधा अगियानु…..!” ’...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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““अदमु करहु वडभागी हो सिम्रहू हरी हरी राए…!” ” हे...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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“ताती वाऊ न लागई पार ब्रह्म सरनाई चौगिरद हमारे राम कार दुसु लगे न भाई “...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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““सेई सियाणा सो पतिवता हुकमु लगे जिसु मीठा जाओ “ “वही सयाना...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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“’ हरी का सेवकु सो हरी जेहा “ “हरी का सेवक हरी के जैसे ही होते...”
– गुरु अर्जुन देव जी का सिखा
Jul 1st
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““कीर्तन निरमोलक हीरा आनंत गुणी गहीरा” “हरी जस कीर्तन अमूल्य...”
– “गुरु अर्जुन देव जी की सिखा “
Jul 1st
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““स्वमाम्सम परमाम्सेन यो वर्थायितुइच्छति नास्ति क्षुद्रतर स्तस्मास स...”
– MAHABHARAT”
Jul 1st
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“भक्शयित्वापी यो माम्सम पश्चादापी निवर्तते तस्यापि सुमहान धर्मो यः पापाद...”
– “MAHABHARAT’
Jul 1st
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“अहर्ता चानुमंता च विशस्ता क्रयविक्रयी संस्कर्ता चोपभोक्ता च खाताकः सर्व एवते...”
– “MAHABHARAT’
Jul 1st
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June 2011
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“UDASIS….!- A TRIBUTE TO MY GURUJI…..!.
Jun 21st
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“लोगों अब बत्यिये -जो ब्रह्मण अपने गुणोंको जारी नहीं रख सकते हैं जिस समाज में र...”
– “RAMDAS”
Jun 6th
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“क्षत्रिय के धर्म और राजाओं के धर्म क्षत्रियोअपि स्थितो राज्ये...”
– ” MAHABHARAT”
Jun 6th
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“तमो रजस्तथा सत्वं गुनानेतान प्रचक्षते अन्योन्य मिथुना: सर्वे तथान्यो न्यानुजीवन...”
– महाभारत -अस्वमेधिक ३६ -४ -११
Jun 6th
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May 2011
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“जब भी हमें मिलो ज़रा हस कर मिला करो , देंगे फकीर तुमको दुवाएं...”
– राजेन्द्र नाथ रहबर
May 30th
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“यह भी एक नेअमत हैं यारों हुम फकीरों केलिए , हुम तुम्हारी बेरुखी को भी दुआ दे...”
– जगनाथ आजाद
May 30th
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“शायद कोई चश्म -ए - करम से आज अपना दामन भी भर दे, उठो उसकी झोली भर दो , बाहर एक...”
– बिमल कृष्ण अश्क
May 30th
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“हम फकिरोंसे जो चाहे दुआ ले जाएँ , कल खुदा जाने किधर हुम को हवा ले...”
– बाली आसी
May 30th
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“बना कर फकीरों का हम ग़ालिब , तमाश-ए - अहल - करम देखते हैं ”
– MIRZA GHALIB
May 30th
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“सर्वे वेदा न तत कुर्य: सर्वे यज्ञश्च भारत यो भक्षयित्वा मंसानी पश्चादापी...”
– ” MAHA BHARAT”
May 30th
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“ददाति यजते चापि तपस्वी च भवन्यती मधुमंसनिवृत्येती प्राह चेवं बृहस्पति: “...”
– ” MAHA BHARAT”
May 30th
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“पुत्र माम्सोपमम जानन खादते योअविच्क्शन: माम्सम मोहसमायुक्त: पुरुषः सेअथं स्मृतः...”
– “MAHA BHARAT”
May 30th
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“यथा सर्वस्चतुश्पात पादेर्न निष्ठती तथैवेयं महिपाल कारने: प्रोच्यते त्रिभिः...”
– “MAHA BHARAT”
May 30th
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““चतुर्विधेयम निर्दिष्टा ह्याहिम्सा ब्रह्मवादिभि : एकेइकतोअपि...”
– “MAHA BHARAT’
May 30th
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“शन्न: सूर्य उरुचक्षा उदेतु shannaschatasr प्रदिशो...”
– RIGVED
May 22nd
“त्वमस्य पारे रजसो व्योमेनः सवभूत्योजा अवसे द्रिशंमन: चकृषे भूमिम...”
– ’ O RESPLENDENT ’ GOD’ , YOU HAVE FRAMED THE EARTH FOR OUR PRESENTATION : YOU ARE THE PERSONIFICATION OF THE VIGOR; YOU HAVE ENCOMPASSED THE FIRMAMENT AND THE SKY EVEN BEYOND THE UNIVERSE KNOWN TO US…..!’
May 22nd
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“चार वर्ण में कोऊ धरे सब भाव सिन्धु ते पार उतरे”
– भगवान श्रीचन्द्र
May 22nd
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“लेखा समवर्ती जीतो नाही बाकी देना सब माहिं एको पसर्य दूजा कोई है ना क्षत्रिय...”
– श्रीचन्द्र सिधांत सागर
May 22nd
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“ॐ ज्ञान खिन्था रहित सूतं प्रेम तागे चले पूतं योग खिन्था युक्तकी , तू पीहर सीधा...”
May 22nd