सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च I
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित: II
नैव चोहर्वे न तिर्यक च नाधस्तान्न कदाचन I
इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन II
******************************************
नाना भावों से युक्त वह महापराक्रमी परमात्मा अकेला हि सम्पूर्ण चराचर भूतों में निवास करता हैं ….!. वह न ऊपर , न अगल- बगल में और न नीचे हि कभी दीखायी देता हैं….!. वह यहाँ इन्द्रियों अधवा बूढी के द्वारा कदापि दीखायी नहीं देता ……!.
(Source: bharatadesam.com)
Posted on Wednesday August 17th
